मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.

मुझे मार ही न डाले इन बादलों की साज़िश, ये जब से बरस रहे हैं तुम याद आ रहे हो.

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मोहब्बत किससे और कब हो जाये अदांजा नहीं होता, ये वो घर है, जिसका दरवाजा नहीं होता.

कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.

उसे अपना कहने की बड़ी तमन्ना थी दिल में, इससे पहले की बात लबों पर आती वो ग़ैर हो गए.

तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

मोहब्बत किससे और कब हो जाये अदांजा नहीं होता, ये वो घर है, जिसका दरवाजा नहीं होता.

कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.

उसे अपना कहने की बड़ी तमन्ना थी दिल में, इससे पहले की बात लबों पर आती वो ग़ैर हो गए.

तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।