क्या ऐसा नहीं हो सकता हम Pyaar मांगे… और तुम Humain गले लगा के कहो, और कुछ?

क्या ऐसा नहीं हो सकता हम Pyaar मांगे… और तुम Humain गले लगा के कहो, और कुछ?

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प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…

ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.

जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को, ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.

प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…

ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.

जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को, ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.