वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !
कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।
तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!
कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.
वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !
कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।
तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!
कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.