कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!
कौन कहता है की सिर्फ चोट ही दर्द देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online आके भी Reply नहीं देती…
में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!
कौन कहता है की सिर्फ चोट ही दर्द देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online आके भी Reply नहीं देती…
में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।