रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।

रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।

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हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.

कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया… दुसरा दिजीए… ये तो टुटा हुआ है….!!?!!

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.

कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया… दुसरा दिजीए… ये तो टुटा हुआ है….!!?!!

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।