दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.
लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.
कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.
लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.
कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.