वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!
वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.
कुछ कदमों के फासले थे, हम दोनों के दरमीयान, उन्हें जमाने ने रोक़ लिया, और हमने अपने आपको।
मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी, उस दौर से गुज़र रही हूँ जो गुजरता ही नहीं
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…
वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!
वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.
कुछ कदमों के फासले थे, हम दोनों के दरमीयान, उन्हें जमाने ने रोक़ लिया, और हमने अपने आपको।
मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी, उस दौर से गुज़र रही हूँ जो गुजरता ही नहीं
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…