ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.
दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!
कौन कहता है की सिर्फ चोट ही दर्द देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online आके भी Reply नहीं देती…
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?
मोहब्बत तो दिल से की थी, दिमाग उसने लगा लिया दिल तोड दिया मेरा उसने और इल्जाम मुझपर लगा दिया.
ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.
दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.
जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं!
कौन कहता है की सिर्फ चोट ही दर्द देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online आके भी Reply नहीं देती…
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?
मोहब्बत तो दिल से की थी, दिमाग उसने लगा लिया दिल तोड दिया मेरा उसने और इल्जाम मुझपर लगा दिया.