हिचकियो से इस बात का एहसास होता है शायद हमे भी कोई कहीं याद करता है बेशक मुलाक़ात नहीं होती मगर कुछ लम्हे हम पर बरबाद तो करता है

हिचकियो से इस बात का एहसास होता है शायद हमे भी कोई कहीं याद करता है बेशक मुलाक़ात नहीं होती मगर कुछ लम्हे हम पर बरबाद तो करता है

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हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.

रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.

हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.

रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.