हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

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प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…

रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…

कुछ नहीं है आज मेरे शब्दों के गुलदस्ते में, कभी कभी मेरी खामोशियाँ भी पढ लिया करो…!!

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हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…

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