उसे अपना कहने की बड़ी तमन्ना थी दिल में, इससे पहले की बात लबों पर आती वो ग़ैर हो गए.

उसे अपना कहने की बड़ी तमन्ना थी दिल में, इससे पहले की बात लबों पर आती वो ग़ैर हो गए.

Share:

More Like This

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है ना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है.

तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…

तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।

रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा, तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी.

हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है ना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है.

तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…

तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।

रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा, तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी.

हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.