रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.

रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.

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नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!

तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!

तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ए खुदा, मोहब्बत उनको मिलती है, जिन्हें करनी नहीं आती.

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.