रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.

रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.

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कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.

कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे, ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी..मेहफिल में गुजार आये।

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.