क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
ये भी अच्छा है कि ये सिर्फ़ सुनता है, दिल अगर बोलता तो क़यामत हो जाती।
क्रोध व्यक्ति का वह चारित्रिक दोष हैं जो अक्सर बने बनाये काम को बिगाड़ देता हैं…
क्रोध वह तेज़ाब है जो किसी भी चीज जिसपर वह डाला जाये ,से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुंचा सकता है जिसमे वह रखा है.
मौन रहना ही क्रोध को वश में करने का सबसे सटीक उपाय हैं…
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं।
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
ये भी अच्छा है कि ये सिर्फ़ सुनता है, दिल अगर बोलता तो क़यामत हो जाती।
क्रोध व्यक्ति का वह चारित्रिक दोष हैं जो अक्सर बने बनाये काम को बिगाड़ देता हैं…
क्रोध वह तेज़ाब है जो किसी भी चीज जिसपर वह डाला जाये ,से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुंचा सकता है जिसमे वह रखा है.
मौन रहना ही क्रोध को वश में करने का सबसे सटीक उपाय हैं…
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं।