"ईर्ष्या और क्रोध से जीवन क्षय होता है।"
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं।
"ईर्ष्या और क्रोध से जीवन क्षय होता है।"
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
क्रोध पर काबू पाने के लिए सदैव उसे फल के विषय में चिन्तन करना चाहिए…
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं।