"जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है |"

"जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है |"

रवीन्द्रनाथ ठाकुर
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क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं जो इस शत्रु को अपने नियंत्रण में रखता हैं उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती हैं…

क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।

देख मेरे जुते भी तेरी नियत से ज्यादा साफ़ है।

नखरे तो सिर्फ मम्मी पापा उठाते है, दुनिया वाले तो बस ऊँगली उठाते है…

क्रोध के नियंत्रण में होना व्यक्ति की दुर्बलता हैं और व्यक्ति द्वारा क्रोध को नियंत्रित करना शक्ति का परिचायक हैं…

मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ… वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…

क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं जो इस शत्रु को अपने नियंत्रण में रखता हैं उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती हैं…

क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।

देख मेरे जुते भी तेरी नियत से ज्यादा साफ़ है।

नखरे तो सिर्फ मम्मी पापा उठाते है, दुनिया वाले तो बस ऊँगली उठाते है…

क्रोध के नियंत्रण में होना व्यक्ति की दुर्बलता हैं और व्यक्ति द्वारा क्रोध को नियंत्रित करना शक्ति का परिचायक हैं…

मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ… वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी…