क्रोध वह तूफ़ान हैं जो ज्ञान के दीपक को बुझा देता हैं…
"क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है |"
क्रोध वह तेज़ाब है जो किसी भी चीज जिसपर वह डाला जाये ,से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुंचा सकता है जिसमे वह रखा है.
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
हर बार जब आप क्रोधित होते हैं, तब आप अपनी ही प्रणाली में ज़हर घोलते हैं।
संसार में मुश्किल कार्यो में से एक हैं क्रोध पर विजय पाना…
क्रोध वह तूफ़ान हैं जो ज्ञान के दीपक को बुझा देता हैं…
"क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है |"
क्रोध वह तेज़ाब है जो किसी भी चीज जिसपर वह डाला जाये ,से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुंचा सकता है जिसमे वह रखा है.
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
हर बार जब आप क्रोधित होते हैं, तब आप अपनी ही प्रणाली में ज़हर घोलते हैं।
संसार में मुश्किल कार्यो में से एक हैं क्रोध पर विजय पाना…