"सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता जितना क्रोध या चिंता से पल भर में थक जाता है।"
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
क्रोध वह तूफ़ान हैं जो ज्ञान के दीपक को बुझा देता हैं…
"क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक।"
क्रोध एक तरह का पागलपन है.
हम तो बेज़ान चीज़ों से भी वफ़ा करते हैं, तुझमे तो फिर भी मेरी जान बसी है।
"सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता जितना क्रोध या चिंता से पल भर में थक जाता है।"
मत पूछना मेरी शख्सियत के बारे में हम जैसे दिखते है वैसे ही लिखते है …!
क्रोध वह तूफ़ान हैं जो ज्ञान के दीपक को बुझा देता हैं…
"क्रोध में हो तो बोलने से पहले दस तक गिनो, अगर ज़्यादा क्रोध में तो सौ तक।"
क्रोध एक तरह का पागलपन है.
हम तो बेज़ान चीज़ों से भी वफ़ा करते हैं, तुझमे तो फिर भी मेरी जान बसी है।