हर बार जब आप क्रोधित होते हैं, तब आप अपनी ही प्रणाली में ज़हर घोलते हैं.
जो व्यक्ति मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता, उसी को क्रोध अधिक आता हैं…
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं!
लड़कियाँ भी मोहब्बत मे ऐसे लड़को को चाँद तारे तोड़कर लाने को कहती है, जिनको मोहल्ले मे कोई कड़ी पत्ता भी तोड़ने नही देता।
यदि सामने वाल गुस्से में हैं, तो आप चुप रहिए…वह थोड़ी देर बाद ख़ुद चुप हो जाएगा…
हर बार जब आप क्रोधित होते हैं, तब आप अपनी ही प्रणाली में ज़हर घोलते हैं.
जो व्यक्ति मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता, उसी को क्रोध अधिक आता हैं…
क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है।
क्रोध के कारण की तुलना में उसके परिणाम कितने गंभीर होते हैं!
लड़कियाँ भी मोहब्बत मे ऐसे लड़को को चाँद तारे तोड़कर लाने को कहती है, जिनको मोहल्ले मे कोई कड़ी पत्ता भी तोड़ने नही देता।
यदि सामने वाल गुस्से में हैं, तो आप चुप रहिए…वह थोड़ी देर बाद ख़ुद चुप हो जाएगा…