इरादे सब मेरे साफ़ होते हैं, इसीलिए, लोग अक्सर मेरे ख़िलाफ़ होते हैँ…!!!
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं जो इस शत्रु को अपने नियंत्रण में रखता हैं उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती हैं…
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
सुधरी हे तो बस मेरी आदते वरना मेरे शौक, वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे हैं…!!!
इरादे सब मेरे साफ़ होते हैं, इसीलिए, लोग अक्सर मेरे ख़िलाफ़ होते हैँ…!!!
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं जो इस शत्रु को अपने नियंत्रण में रखता हैं उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती हैं…
जब सहनशीलता की सीमा पार करती है, तब प्रतिशोध की चिंगारी उठती है । यह चिंगारी क्रोध की ज्वाला बन जाती है, और फिर ज्वाला कहाँ देखती है कि, अपना घर जल रहा है, या दुश्मन का ।
अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया, जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।
सुधरी हे तो बस मेरी आदते वरना मेरे शौक, वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे हैं…!!!