क्रोध एक ऐसा श्राप हैं जो मनुष्य खुद को देता हैं…
"तुम अपने क्रोध के लिए दंड नहीं पाओगे, तुम अपने क्रोध द्वारा दंड पाओगे।"
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
क्रोध वह तेज़ाब है जो किसी भी चीज जिसपर वह डाला जाये ,से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुंचा सकता है जिसमे वह रखा है.
एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आँख बंद कर लेता है.
सुना है तुम्हे मोहोबत का सोक नहीं है लेकिन बर्बाद तो तुम कमाल का करती हो.
क्रोध एक ऐसा श्राप हैं जो मनुष्य खुद को देता हैं…
"तुम अपने क्रोध के लिए दंड नहीं पाओगे, तुम अपने क्रोध द्वारा दंड पाओगे।"
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
क्रोध वह तेज़ाब है जो किसी भी चीज जिसपर वह डाला जाये ,से ज्यादा उस पात्र को अधिक हानि पहुंचा सकता है जिसमे वह रखा है.
एक क्रोधित व्यक्ति अपना मुंह खोल लेता है और आँख बंद कर लेता है.
सुना है तुम्हे मोहोबत का सोक नहीं है लेकिन बर्बाद तो तुम कमाल का करती हो.