क्रोध व्यक्ति का वह चारित्रिक दोष हैं जो अक्सर बने बनाये काम को बिगाड़ देता हैं…
जो व्यक्ति मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता, उसी को क्रोध अधिक आता हैं…
हम समंदर हैं, हमें खामोश ही रहने दो…. ज़रा मचल गये, तो शहर ले डूबेंगे…
अच्छे होते हैं बुरे लोग जो अच्छा होने का नाटक तो नहीं करते॥
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है
क्रोध व्यक्ति का वह चारित्रिक दोष हैं जो अक्सर बने बनाये काम को बिगाड़ देता हैं…
जो व्यक्ति मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप से कह नहीं सकता, उसी को क्रोध अधिक आता हैं…
हम समंदर हैं, हमें खामोश ही रहने दो…. ज़रा मचल गये, तो शहर ले डूबेंगे…
अच्छे होते हैं बुरे लोग जो अच्छा होने का नाटक तो नहीं करते॥
"क्रोध मूर्खों के ह्रदय में ही बसता है।"
मेरी ख़ामोशी को कमजोरी ना समझ ऐ काफिर … गुमनाम समन्दर ही खौफ लाता है