चले जाने दो उस बेवफ़ा को किसी और की बाहों में जो इतनी चाहत के बाद मेरा ना हुआ वो किसी और का क्या होगा
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
इश्क़ में इतनी बेपरवाहियाँ भी ठीक नही हैं, बात हम नही करते ...तो तकल्लुफ तुम भी नही करते...!!
सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?
चले जाने दो उस बेवफ़ा को किसी और की बाहों में जो इतनी चाहत के बाद मेरा ना हुआ वो किसी और का क्या होगा
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
इश्क़ में इतनी बेपरवाहियाँ भी ठीक नही हैं, बात हम नही करते ...तो तकल्लुफ तुम भी नही करते...!!
सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?