हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम

हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम

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मैं मर भी जाऊँ तोह उसे खबर न देना कही वक़्त न बर्बाद हो जाये उसका

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?

मैं मर भी जाऊँ तोह उसे खबर न देना कही वक़्त न बर्बाद हो जाये उसका

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?