प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.
ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.
ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!