अच्छी लगती है ये खामोशियाँ भी अब हर किसी को जवाब देने का सिलसिला ख़त्म हो गया।

अच्छी लगती है ये खामोशियाँ भी अब हर किसी को जवाब देने का सिलसिला ख़त्म हो गया।

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मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

समझ में ही नही आता कभी-कभी, ये सब क्या हो रहा जिंदगी में...बस.. चुप-चाप तमाशे देख रही हु जिंदगी के...

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

समझ में ही नही आता कभी-कभी, ये सब क्या हो रहा जिंदगी में...बस.. चुप-चाप तमाशे देख रही हु जिंदगी के...

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का