मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!
कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न
मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!
कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न