मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?
काश तू लौट आये और कहे बस बहुत हो गया अब नहीं रहा जाता तेरे बिना
बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है
उसको मालूम तो हैं मेरे हालातो के बारे मे, फिर खैरियत पूछकर मेरी मुश्किलें क्यों बढ़ाते हैं |
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…
दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?
काश तू लौट आये और कहे बस बहुत हो गया अब नहीं रहा जाता तेरे बिना
बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है
उसको मालूम तो हैं मेरे हालातो के बारे मे, फिर खैरियत पूछकर मेरी मुश्किलें क्यों बढ़ाते हैं |
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है