किस ने गिनी हैं साँसे कितनी यह आएंगी ना जाने कौन सी सांसें मेरी मुझे मेरे कृष्णा से मिलाएगी
संकट में मनुष्य को वास्तु दोष, पितर दोष शनि दोष सब याद आ जाते है, लेकिन अपने दोष दिखाई नही देते है
एक इच्छा तुम्हे मंजिल तक पंहुचा देगी... लेकिन अनेक इछाइए तुम्हे मंजिल से भटका देग
इंसान को इंसान के नजरिये से तोलिये दो शब्द ही सही मगर प्यार से बोलिये
अगर हम खुद की माने और विश्वाश करे तो हमारा हर कदम सफलता है
लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।
किस ने गिनी हैं साँसे कितनी यह आएंगी ना जाने कौन सी सांसें मेरी मुझे मेरे कृष्णा से मिलाएगी
संकट में मनुष्य को वास्तु दोष, पितर दोष शनि दोष सब याद आ जाते है, लेकिन अपने दोष दिखाई नही देते है
एक इच्छा तुम्हे मंजिल तक पंहुचा देगी... लेकिन अनेक इछाइए तुम्हे मंजिल से भटका देग
इंसान को इंसान के नजरिये से तोलिये दो शब्द ही सही मगर प्यार से बोलिये
अगर हम खुद की माने और विश्वाश करे तो हमारा हर कदम सफलता है
लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।