मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं
जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही
अपने लिए नहीं तो उनके लिए कामयाब बनो जो आपको नाकामयाब देखना चाहते हैं .
उन पर ध्यान मत दीजिये जो आपकी पीठ पीछे बात करते है , इसका सीधा अर्थ है कि आप उनसे दो कदम आगे है।
विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है
धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहना भी अच्छा है..कम से कम उन लोगो से तो आगे रहोगे जो Try भी नही कर रहे
मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं
जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही
अपने लिए नहीं तो उनके लिए कामयाब बनो जो आपको नाकामयाब देखना चाहते हैं .
उन पर ध्यान मत दीजिये जो आपकी पीठ पीछे बात करते है , इसका सीधा अर्थ है कि आप उनसे दो कदम आगे है।
विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है
धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहना भी अच्छा है..कम से कम उन लोगो से तो आगे रहोगे जो Try भी नही कर रहे