सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.

सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.

Share:

More Like This

भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना

जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी

एक बार काम को सच्ची लगन से शुरू तो करो कुदरत ख़ुद ब खुद रास्ते खोलता जाएगा

अपनी "आदतों" के अनुसार चलने में इतनी "गलतियां" नहीं होती जितना "दुनिया" का ख्याल और "लिहाज़" रखकर चलने में होती है।

मुश्किलें हमेशा बेहतरीन लोगों के हिस्से में आती है, क्योंकि वो लोग ही उन्हें बेहतरीन तरीके से अंजाम देने की ताकत रखते हैं

दिल लगाने से अच्छा है, पेड़ लगाऐ, वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे

भगवान से निराश कभी मत होना, संसार से आशा कभी मत करना

जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी

एक बार काम को सच्ची लगन से शुरू तो करो कुदरत ख़ुद ब खुद रास्ते खोलता जाएगा

अपनी "आदतों" के अनुसार चलने में इतनी "गलतियां" नहीं होती जितना "दुनिया" का ख्याल और "लिहाज़" रखकर चलने में होती है।

मुश्किलें हमेशा बेहतरीन लोगों के हिस्से में आती है, क्योंकि वो लोग ही उन्हें बेहतरीन तरीके से अंजाम देने की ताकत रखते हैं

दिल लगाने से अच्छा है, पेड़ लगाऐ, वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे