जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.

जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.

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शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।

जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।

मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

अपनी अमीरी के चर्चे कभी किसी से ना करे क्योंकि आपके सुख से सूखी होने वाले इस दुनिया मे आपके माता-पिता के अतरिक्त कोई तीसरा नही होग

ज़िन्दगी को हमेशा मुस्कुरा के गुजारो क्योंकि आप ये नही जानते कि ये कितनी बाकी है

ईश्वर की महिमा की थाह कोई नहीं पा सकता. वह पल भर में राजा को रंक और रंक को राजा बना सकता है. धनी को निर्धन और निर्धन को धनी करना उसके लिए सहज है.

शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।

जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।

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ज़िन्दगी को हमेशा मुस्कुरा के गुजारो क्योंकि आप ये नही जानते कि ये कितनी बाकी है

ईश्वर की महिमा की थाह कोई नहीं पा सकता. वह पल भर में राजा को रंक और रंक को राजा बना सकता है. धनी को निर्धन और निर्धन को धनी करना उसके लिए सहज है.