जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.

जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.

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प्रॉब्लम उतनी पॉवरफुल नही जितना हम उन्हें मान लेते है, कभी सुना है क्या अंधेरे ने सुबह नही होने दी

हौसला और घोंसला मत छोड़िए बाकी सब ठीक रहेगा खुद को इतना कमजोर मत बनाना कि, दूसरों के एहसान की जरूरत पड़ने लगे

कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है

भीख मांगना मना है सिख नही

अगर आप किसी की सफ़लता से खुश नहीं होते तो आप कभी सफ़ल नही हो सकते

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

प्रॉब्लम उतनी पॉवरफुल नही जितना हम उन्हें मान लेते है, कभी सुना है क्या अंधेरे ने सुबह नही होने दी

हौसला और घोंसला मत छोड़िए बाकी सब ठीक रहेगा खुद को इतना कमजोर मत बनाना कि, दूसरों के एहसान की जरूरत पड़ने लगे

कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है

भीख मांगना मना है सिख नही

अगर आप किसी की सफ़लता से खुश नहीं होते तो आप कभी सफ़ल नही हो सकते

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है