क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.

क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.

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कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

अपने किरदार को जितना अच्छा रख सकते हो रखो क्योंकि मौत इंसान को मार सकती है मगर अच्छे किरदार वाले हमेशा जिंदा रहते हैं । दिलों में भी और अच्छे लफ्ज़ों में भी।

ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

जो आपकी सही बातों का भी गलत मतलब निकालते है उनको सफाई देने में अपना वक़्त बर्बाद ना करे

जीवन मे सिर्फ वहाँ तक ही "झुकना' चाहिए जहाँ तक सम्बन्धो में "लचकता" और मन मे "आत्मसम्मान" बना रहे

सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!

कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

अपने किरदार को जितना अच्छा रख सकते हो रखो क्योंकि मौत इंसान को मार सकती है मगर अच्छे किरदार वाले हमेशा जिंदा रहते हैं । दिलों में भी और अच्छे लफ्ज़ों में भी।

ये सोच है हम इसांनो की कि एक अकेला क्या कर सकता है पर देख जरा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है।

जो आपकी सही बातों का भी गलत मतलब निकालते है उनको सफाई देने में अपना वक़्त बर्बाद ना करे

जीवन मे सिर्फ वहाँ तक ही "झुकना' चाहिए जहाँ तक सम्बन्धो में "लचकता" और मन मे "आत्मसम्मान" बना रहे

सलाह के सौ शब्दों से ज्यादा ..! अनुभव की एक ठोकर इंसान को बहुत मजबूत बनाती है ..!!