क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.

क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.

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दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।

परम शत्रु से भी ज्यादा घातक है गलत दिशा में भटकता हुआ आपका मन

दुनिया में कोई भी चीज़ कितनी भी कीमती क्यों न हो। परन्तु.... नींद,शांति,और आनन्द से बढ़कर कुछ भी नही।

यकीन रखिए, रब दूसरा दरवाजा खोले बगैर पहला दरवाजा बंद नहीं करता |

बहुत ज़रूरी है जिंदगी में थोड़ा खालीपन क्योंकि यही वो समय है जहाँ हमारी मुलाकात 'हमसे' होती है

फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है

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यकीन रखिए, रब दूसरा दरवाजा खोले बगैर पहला दरवाजा बंद नहीं करता |

बहुत ज़रूरी है जिंदगी में थोड़ा खालीपन क्योंकि यही वो समय है जहाँ हमारी मुलाकात 'हमसे' होती है

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