क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.

क्रोध यमराज के समान है, वह सब कुछ नष्ट कर डालता है. संतोष ही सुख-वैभव प्रदान करता है. विद्या कामधेनु के समान है और तृष्णा वैतरणी के समान कष्टकर है. हमें इन बातों को व्यवहार में लाकर इनके अनुसार ही कार्य करना चाहिए.

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किसी को परेशान देखकर अगर हमें तकलीफ होती हैं तो यकीन मानिए ईश्वर ने हमें इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की है

सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो............ बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है!!

यदि कोई आपके बुरे के दौरान आपका

जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको

परेशानियां हमारी कमजोरियां साबित नही करती बल्कि यह बताती है कि हमे और

हमेशा अपनी "बात" कहनें का अन्दाज खूबसूरत रखो.... ताकि "जवाब" भीं खूबसूरत सुन सको.. प्रेम की धारा, बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है, हर महफ़िल में.

किसी को परेशान देखकर अगर हमें तकलीफ होती हैं तो यकीन मानिए ईश्वर ने हमें इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की है

सिर्फ उतना ही विनम्र बनो जितना जरुरी हो............ बेवजह विनम्रता दूसरों के अहम को बढ़ावा देती है!!

यदि कोई आपके बुरे के दौरान आपका

जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको

परेशानियां हमारी कमजोरियां साबित नही करती बल्कि यह बताती है कि हमे और

हमेशा अपनी "बात" कहनें का अन्दाज खूबसूरत रखो.... ताकि "जवाब" भीं खूबसूरत सुन सको.. प्रेम की धारा, बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है, हर महफ़िल में.