ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है
विदेश में विद्या मित्र के समान होती है, औषधि रोगियों कि मित्र होती है, पत्नी घर में मित्र होती है और मृतक का मित्र होता है- धर्म .
मदद करने के लिए केवल धन की जरूरत नहीं होती उसके लिए एक अच्छे मन की जरूरत भी होती है
ईश्वर सिर्फ दिशा दिखा सकता है उस पथ पर चलना, हमारा काम है और वास्तविकता में अगर तुम चलना ही नहीं चाहते फिर तुम्हारा ईश्वर को दोष देना व्यर्थ है!
लम्बा सफ़र तय करना है तो...ठोकरों से मुलाकात लाज़मी है...!!
दुसरो पर P.H.D करने से बेहतर है हम खुद "GRADUATE" हो जाये
ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है
विदेश में विद्या मित्र के समान होती है, औषधि रोगियों कि मित्र होती है, पत्नी घर में मित्र होती है और मृतक का मित्र होता है- धर्म .
मदद करने के लिए केवल धन की जरूरत नहीं होती उसके लिए एक अच्छे मन की जरूरत भी होती है
ईश्वर सिर्फ दिशा दिखा सकता है उस पथ पर चलना, हमारा काम है और वास्तविकता में अगर तुम चलना ही नहीं चाहते फिर तुम्हारा ईश्वर को दोष देना व्यर्थ है!
लम्बा सफ़र तय करना है तो...ठोकरों से मुलाकात लाज़मी है...!!
दुसरो पर P.H.D करने से बेहतर है हम खुद "GRADUATE" हो जाये