जब दुनिया आपको कमजोर समझे तो फिर आपका जितना बहुत जरुरी हो जाता है..

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कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता

एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करे जो आपको सुबह बिस्तर से उठने पर मजबूर कर दे

अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है

मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं

“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !

अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है

कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता

एक ऐसा लक्ष्य निर्धारित करे जो आपको सुबह बिस्तर से उठने पर मजबूर कर दे

अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है

मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं

“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !

अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है