बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना
यदि हम असफलता से शिक्षा प्राप्त करते हैं तो वह सफलता ही है
जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
रत्न तो लाख मिले एक ह्रदय धन न मिला, दर्द हर वक्त मिला, चैन किसी क्षण न मिला, ढूँढ़ते-ढूँढ़ते ढल गई धूप जीवन की मगर, दूसरी बार लौट के हमें बचपन न मिला...!
हम भी परिंदो की तरह एक दिन उड़ेंगे लड़ना पड़े अगर रातों से तो लड़ेंगे, इस बार न कर पाए अगर मुकाम हासिल, तो दुबारा उससे भी ज्यादा मेहनत करेंगे।
बोलकर सोचने से बेहतर है सोचकर बोलना
यदि हम असफलता से शिक्षा प्राप्त करते हैं तो वह सफलता ही है
जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
रत्न तो लाख मिले एक ह्रदय धन न मिला, दर्द हर वक्त मिला, चैन किसी क्षण न मिला, ढूँढ़ते-ढूँढ़ते ढल गई धूप जीवन की मगर, दूसरी बार लौट के हमें बचपन न मिला...!
हम भी परिंदो की तरह एक दिन उड़ेंगे लड़ना पड़े अगर रातों से तो लड़ेंगे, इस बार न कर पाए अगर मुकाम हासिल, तो दुबारा उससे भी ज्यादा मेहनत करेंगे।