बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात पता है क्या है ? वो भी बीत जाता है
संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही
सफलता उन्ही कामो को करने से मिलती है... जिन कामो को करने में आपका मन नही लगता..
हम रिश्तों को और अधिक बेहतरीन बना सकते है अपनी सोच में छोटा सा बदलाव करके कि सामने वाला गलत नही है सिर्फ हमारी उम्मीद से थोड़ा अलग हैं
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं
बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात पता है क्या है ? वो भी बीत जाता है
संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही
सफलता उन्ही कामो को करने से मिलती है... जिन कामो को करने में आपका मन नही लगता..
हम रिश्तों को और अधिक बेहतरीन बना सकते है अपनी सोच में छोटा सा बदलाव करके कि सामने वाला गलत नही है सिर्फ हमारी उम्मीद से थोड़ा अलग हैं
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं