जब दुनिया आपको कमजोर समझे तो फिर आपका जितना बहुत जरुरी हो जाता है..

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मनुष्य जैसे लोगों के बीच उठता-बैठता है, जैसो की सेवा करता है तथा जैसा बनने की कमाना करता है, वैसा ही बन जाता है।

आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं

ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी

शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।

जल्द मिलने वाली चीजे ज्यादा दिन तक नही चलती, और जो चीजे ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्दी नही मिलती।

मनुष्य जैसे लोगों के बीच उठता-बैठता है, जैसो की सेवा करता है तथा जैसा बनने की कमाना करता है, वैसा ही बन जाता है।

आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं

ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी

शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।

जल्द मिलने वाली चीजे ज्यादा दिन तक नही चलती, और जो चीजे ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्दी नही मिलती।