"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखिए कि जो भी आपको खोएगा यकीनन वो रोएगा ।
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखिए कि जो भी आपको खोएगा यकीनन वो रोएगा ।
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता