अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करे
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.
जिसने खर्च कम करने की बात सोची समझ लो उसने कमाने की अकल खो दी....
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
जो व्यवहार आपको दूसरों से पसंद ना हो ऐसा व्यवहार आप दूसरों के साथ भी ना करे
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.
जिसने खर्च कम करने की बात सोची समझ लो उसने कमाने की अकल खो दी....
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता