इंसान मकान बदलता है रिश्ते बदलता है दोस्त बदलते है लेकिन फिर भी दुखी रहता है क्यूं कि वो अपना रवैया नहीं बदलता..

इंसान मकान बदलता है रिश्ते बदलता है दोस्त बदलते है लेकिन फिर भी दुखी रहता है क्यूं कि वो अपना रवैया नहीं बदलता..

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इंसान सफल तब होता है जब वो दुनिया को नही बल्कि खुद को बदलना शुरू कर देता है।

""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।

जीवन मे सिर्फ वहाँ तक ही "झुकना' चाहिए जहाँ तक सम्बन्धो में "लचकता" और मन मे "आत्मसम्मान" बना रहे

सबसे बड़ा गुरु ठोकर हैं खाते जाओगे सीखते जाओगे.

प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है

अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो

इंसान सफल तब होता है जब वो दुनिया को नही बल्कि खुद को बदलना शुरू कर देता है।

""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।

जीवन मे सिर्फ वहाँ तक ही "झुकना' चाहिए जहाँ तक सम्बन्धो में "लचकता" और मन मे "आत्मसम्मान" बना रहे

सबसे बड़ा गुरु ठोकर हैं खाते जाओगे सीखते जाओगे.

प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है

अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो