अहंकार की बस एक खराबी है ये कभी आपको महसूस ही नही होने देता कि आप गलत है
अपनी परेशानियों की वजह दूसरों को मानने से आपकी परेशानियां कभी कम नहीं हो सकती हैं।
परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
मन मे उतरना और मन से उतरना, केवल आपके स्वभाव पर निर्भर करता है
आप क्या काम करते हो ? असल में वो हिसाब लगाते हैं कि आपको कितनी "इज्जत" देनी है।
अहंकार की बस एक खराबी है ये कभी आपको महसूस ही नही होने देता कि आप गलत है
अपनी परेशानियों की वजह दूसरों को मानने से आपकी परेशानियां कभी कम नहीं हो सकती हैं।
परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
मन मे उतरना और मन से उतरना, केवल आपके स्वभाव पर निर्भर करता है
आप क्या काम करते हो ? असल में वो हिसाब लगाते हैं कि आपको कितनी "इज्जत" देनी है।