मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.

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​"सफलता का सफर कितना अच्छा होगा, यह हमारे विचार और व्यवहार पर निर्भर करता है।"​

महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है

जीवन मे मेहनत करने से दिमाग साफ रहता हैं और सत्य बोलने से दिल साफ रहता हैं.

तुम्हे अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी क्युकि लोग बुरे वक़्त में सिर्फ सलाह देते है साथ नहीं

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

प्रेम में बोला गया मात्र एक झूठ कभी ना टूटने वाले संबंध की जड़े भी हिला देता है

​"सफलता का सफर कितना अच्छा होगा, यह हमारे विचार और व्यवहार पर निर्भर करता है।"​

महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है

जीवन मे मेहनत करने से दिमाग साफ रहता हैं और सत्य बोलने से दिल साफ रहता हैं.

तुम्हे अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी क्युकि लोग बुरे वक़्त में सिर्फ सलाह देते है साथ नहीं

यदि तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तो मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है

प्रेम में बोला गया मात्र एक झूठ कभी ना टूटने वाले संबंध की जड़े भी हिला देता है