धोखा कोई एक देता है और, नफरत सबसे हो जाती है।
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
अगर किसी ने आपको कभी धोखा दिया हो, तो उसी बात के लिए अक्सर आंसू बहाना मुर्खता है.
जब जब तेरी याद पास आती है मेरे….. मैं तेरे दिए धोखे और बेवफ़ाई को याद कर लेती हूँ..!!
धोखा कोई एक देता है और, नफरत सबसे हो जाती है।
“धोखे” की “फितरत” है,,, “धोखा” ही “खाने” की….!!!
अर्ज़ किया है… कि… मेरी शायरी में अब भी दर्द की कमी है शायद तेरे धोखे का इंतज़ार है इस दिल को!
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
अगर किसी ने आपको कभी धोखा दिया हो, तो उसी बात के लिए अक्सर आंसू बहाना मुर्खता है.
जब जब तेरी याद पास आती है मेरे….. मैं तेरे दिए धोखे और बेवफ़ाई को याद कर लेती हूँ..!!