इंसान को धोखा कभी भी इंसान नहीं देता…! उसकी उम्मीदें देती हैं जो वो दूसरों से अपेक्षा करता है.!!
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
धोखा कभी भी मरता नहीं है । आज आप दोगे, कल आपको मिलेगा ।।
कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।
इंसान को धोखा कभी भी इंसान नहीं देता…! उसकी उम्मीदें देती हैं जो वो दूसरों से अपेक्षा करता है.!!
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
धोखा कभी भी मरता नहीं है । आज आप दोगे, कल आपको मिलेगा ।।
कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
हम शिकवा करें क्या किसी से, यहाँ हर ओर बेवफाई है। उसे धोखा दिया किसी और ने, उसकी भी सजा हमने पाई है।।