दिन भी गुजरता है किसी के इंतज़ार में रात भी कटती है किसी की याद में ये हमारी हे ज़िन्दगी किसी और के लिए इतना बेचैन क्यों रहती है

दिन भी गुजरता है किसी के इंतज़ार में रात भी कटती है किसी की याद में ये हमारी हे ज़िन्दगी किसी और के लिए इतना बेचैन क्यों रहती है

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मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे, चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे!!

बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में. वो दिल नीलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी.

हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!

उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!

तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.

जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।

मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे, चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे!!

बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में. वो दिल नीलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी.

हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!

उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!

तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.

जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।