दिन भी गुजरता है किसी के इंतज़ार में रात भी कटती है किसी की याद में ये हमारी हे ज़िन्दगी किसी और के लिए इतना बेचैन क्यों रहती है

दिन भी गुजरता है किसी के इंतज़ार में रात भी कटती है किसी की याद में ये हमारी हे ज़िन्दगी किसी और के लिए इतना बेचैन क्यों रहती है

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नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…

है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…

है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.