काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता
ख्वाब तो मीठे देखे थे... ताज्जुब हैं... आखों का पानी खारा कैसे हो गया...!
उस शाम तुमने मुड़कर मुझे देखा जब, यूँ लगा जैसे हर दुआ कुबूल हो गयी
रिश्ते वो होते हैं जिसमे तकरार कम और प्यार ज्यादा हो जिसमे सवाल कम और विश्वास ज्यादा हो
बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए
बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |
काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता
ख्वाब तो मीठे देखे थे... ताज्जुब हैं... आखों का पानी खारा कैसे हो गया...!
उस शाम तुमने मुड़कर मुझे देखा जब, यूँ लगा जैसे हर दुआ कुबूल हो गयी
रिश्ते वो होते हैं जिसमे तकरार कम और प्यार ज्यादा हो जिसमे सवाल कम और विश्वास ज्यादा हो
बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए
बस जाते हैं दिल में इजाज़त लिए बगैर, वो जिन्हें हम ज़िन्दगी भर पा नहीं सकते |