लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।
मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…
लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में
यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी
चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।
मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…