मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम, ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम।
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
कभी कभी बहुत सताता है यह सवाल मुझे, हम मिले ही क्यों थे, जब हमें मिलना ही नहीं था
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम, ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम।
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
कभी कभी बहुत सताता है यह सवाल मुझे, हम मिले ही क्यों थे, जब हमें मिलना ही नहीं था
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।