वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।