टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।
जार सी ज़िन्दगी है अरमान बहुत है, हमदर्द कोई नहीं यह, इंसान बहुत है, दिल का दर्द सुनाएं तो सुनाये किसको, जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है.
समंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जबसे, कोई भी लफ्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं।
रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता
बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।
जार सी ज़िन्दगी है अरमान बहुत है, हमदर्द कोई नहीं यह, इंसान बहुत है, दिल का दर्द सुनाएं तो सुनाये किसको, जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है.
समंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जबसे, कोई भी लफ्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं।
रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता
बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।