नए लोग से आज कुछ तो सीखा हे, पहले अपने जैसा बनाते हे फिर अकेला छोड़ देते है...
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..
हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है
सच्चा प्यार सिर्फ वो लोग कर सकते हैं...जो किसी का प्यार पाने के लिए तरस चुके हो.
नए लोग से आज कुछ तो सीखा हे, पहले अपने जैसा बनाते हे फिर अकेला छोड़ देते है...
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
बात ये नहीं थी, कुछ कहना था तुम्हें.. तकलीफ़ ये है, कि तुम ख़ामोश क्यूँ रहे..
हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है
सच्चा प्यार सिर्फ वो लोग कर सकते हैं...जो किसी का प्यार पाने के लिए तरस चुके हो.