वक़्त निकल जाने के बाद जो कदर करे उससे कदर नहीं अफ़सोस कहते है..

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ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो

ज़रा सा खुश क्या होती हूँ किस्मत को बुरा लग जाता है

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे

हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..

कुछ चुप रहती हूँ, कुछ बोलती हूँ, कुछ रिश्ते मेरे इसी से संभले हुए हैं ......

अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो