वक़्त निकल जाने के बाद जो कदर करे उससे कदर नहीं अफ़सोस कहते है..

वक़्त निकल जाने के बाद जो कदर करे उससे कदर नहीं अफ़सोस कहते है..

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दिल की बात तो हर कोई करता है लेकिन मरते सब चेहरों पर ही हैं

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .

सिर्फ एक बहाने की तलाश होती है निभाने वाले को भी, और जाने वाले को भी

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है

दिल की बात तो हर कोई करता है लेकिन मरते सब चेहरों पर ही हैं

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .

सिर्फ एक बहाने की तलाश होती है निभाने वाले को भी, और जाने वाले को भी

टूट कर चाहना और टूट जाना बात छोटी है मगर जान निकल जाती है