कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं?
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं?