वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.