कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते, हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम

कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते, हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम

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खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।

ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे साहब हम वहाँ मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!

खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।

ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

खो कर फिर तुम हमें पा ना सकोगे साहब हम वहाँ मिलेंगे जहाँ तुम आ ना सकोगे

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!