कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते, हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम

कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते, हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम

Share:

More Like This

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है, पर ज्यादा तकलीफ तो तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना ले

बहुत शौक से उतरे थे इश्क के समुन्दर में.. पहली ही लहर ने ऐसा डुबोया कि आज तक किनारा ना मिला

मोहब्बत नहीं है उसे मुझसे ये जानता हूँ मैं फिर भी ये बात कहाँ मानता हूँ मैं

ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है, पर ज्यादा तकलीफ तो तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना ले

बहुत शौक से उतरे थे इश्क के समुन्दर में.. पहली ही लहर ने ऐसा डुबोया कि आज तक किनारा ना मिला

मोहब्बत नहीं है उसे मुझसे ये जानता हूँ मैं फिर भी ये बात कहाँ मानता हूँ मैं