खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .
वो ज़िंदगी ही क्या जिसमे मोहब्बत नही, वो मोहबत ही क्या जिसमे यादें नही, वो यादें क्या जिसमे तुम नही, और वो तुम ही क्या जिसके साथ हम नही!!
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
मेरा दिल सिर्फ तुम्हारे लिए धड़कता है
प्यार वो नहीं है जो दुनिया को दिखाया जाये बल्कि वो है जो दिल से निभाया जाए
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये
खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .
वो ज़िंदगी ही क्या जिसमे मोहब्बत नही, वो मोहबत ही क्या जिसमे यादें नही, वो यादें क्या जिसमे तुम नही, और वो तुम ही क्या जिसके साथ हम नही!!
मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी
मेरा दिल सिर्फ तुम्हारे लिए धड़कता है
प्यार वो नहीं है जो दुनिया को दिखाया जाये बल्कि वो है जो दिल से निभाया जाए
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये