कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।
धोखा करके किसी के साथ वफा की उम्मीद करते हैं कुछ लोग बुरा करके अपने साथ अच्छा होने की दुआ करते हैं!
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
प्यार में धोखा खाने के बाद सम्भलने में वर्षों लग जाते हैं.
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
जब हम गलत लोगों से उम्मीद पाल लेते हैं, तब हम खुद को खुद धोखा देते हैं.
कोई था क्या नशा तेरी आँखों के बराबर? कोई होगा क्या नशा तेरे जाने के बाद? सब ठीक तो था, बेवफाई करनी क्या जरुरी थी? छोडिए अब उनका जिक्र, हम फिर कोई मयखाना पी जाएंगे ।।
धोखा करके किसी के साथ वफा की उम्मीद करते हैं कुछ लोग बुरा करके अपने साथ अच्छा होने की दुआ करते हैं!
हक़ीक़त क्या है आँखों के सामने नजर आता है धोखे खाने से तजुर्बा अक़्सर बढ़ जाता है!
प्यार में धोखा खाने के बाद सम्भलने में वर्षों लग जाते हैं.
पत्थरों के शहर इश्क़ कमाया.. नैनों का धोखा दिल ने चुकाया
जब हम गलत लोगों से उम्मीद पाल लेते हैं, तब हम खुद को खुद धोखा देते हैं.