इरादा होता अगर उसका साथ चलने का, तो बहाने नही रास्ते ढूंढते वो..

इरादा होता अगर उसका साथ चलने का, तो बहाने नही रास्ते ढूंढते वो..

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क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए

आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.

कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!

तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी

क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए

आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.

कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है

उसे क्या फर्क पड़ता है बिछड़ने क्या, सच्ची मोहबत तो मेरी थी उसकी तो नही थी

बात करने से ही बात बनती है..बात ना करने से, बातें बन जाती है ..!

तेरी-मेरी राहें तो कभी एक थी ही नहीं, फिर शिकवा कैसा और शिकायत कैसी