उनकी ना थी कोई खता हम ही गलत समझ बैठे वो मोहब्बत से बात करते थे हम मोहब्बत समझ बैठे...

उनकी ना थी कोई खता हम ही गलत समझ बैठे वो मोहब्बत से बात करते थे हम मोहब्बत समझ बैठे...

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कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

तरस गए हैं तेरे Muh से कुछ सुनने को हम, Pyaar की बात न सही कोई शिकायत ही कर दे..!!

दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.

सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.

फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता

कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

तरस गए हैं तेरे Muh से कुछ सुनने को हम, Pyaar की बात न सही कोई शिकायत ही कर दे..!!

दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.

सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.

फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता