उनकी ना थी कोई खता हम ही गलत समझ बैठे वो मोहब्बत से बात करते थे हम मोहब्बत समझ बैठे...

उनकी ना थी कोई खता हम ही गलत समझ बैठे वो मोहब्बत से बात करते थे हम मोहब्बत समझ बैठे...

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गुज़रें हैं ज़िन्दगी में ऐसे भी लम्हे कभी कभी दिल रो पड़ा है .. सुनके लतीफ़े कभी कभी.

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

सालो लग जाते प्यार वाले जख्म भरने में

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.

बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

गुज़रें हैं ज़िन्दगी में ऐसे भी लम्हे कभी कभी दिल रो पड़ा है .. सुनके लतीफ़े कभी कभी.

मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.

सालो लग जाते प्यार वाले जख्म भरने में

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.

बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।