आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..
कैसे छोड दूं आखिर तुझसे मोहब्बत करना...तू मेरी किस्मत में ना सही.. दिल में तो है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..
कैसे छोड दूं आखिर तुझसे मोहब्बत करना...तू मेरी किस्मत में ना सही.. दिल में तो है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।