आज परछाई से पूछ ही लिया, क्यों चलते हो.. मेरे साथ..उसने भी हंसके कहा, और कौन है...तेरे साथ !!
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
जो फ़ुरसत मिली तो मुड़कर देख लेता मुझे एक दफा तेरे प्यार में पागल होने की चाहत मुझे आज भी हे !
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?
आज परछाई से पूछ ही लिया, क्यों चलते हो.. मेरे साथ..उसने भी हंसके कहा, और कौन है...तेरे साथ !!
शाम नहीं पर बात वही. तू नहीं तो तेरी याद सही.
मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
जो फ़ुरसत मिली तो मुड़कर देख लेता मुझे एक दफा तेरे प्यार में पागल होने की चाहत मुझे आज भी हे !
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?