याद हैं हमको अपने तीनो गुनाह ! एक तो मोहबत कर ली, दूसरा तुमसे कर ली और तीसरा बेपनाह कर ली...!
जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के
लाख तेरे चाहने वाले होंगे मगर तुझे महसूस सिर्फ मैंने किया है
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है
कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी तभी मेरी याद उसे अब नहीं आती ..
याद हैं हमको अपने तीनो गुनाह ! एक तो मोहबत कर ली, दूसरा तुमसे कर ली और तीसरा बेपनाह कर ली...!
जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के
लाख तेरे चाहने वाले होंगे मगर तुझे महसूस सिर्फ मैंने किया है
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है
कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी तभी मेरी याद उसे अब नहीं आती ..