अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

Share:

More Like This

चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया... दुसरा दिजीए... ये तो टुटा हुआ है....

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

आज परछाई से पूछ ही लिया, क्यों चलते हो.. मेरे साथ..उसने भी हंसके कहा, और कौन है...तेरे साथ !!

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है

चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया... दुसरा दिजीए... ये तो टुटा हुआ है....

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

आज परछाई से पूछ ही लिया, क्यों चलते हो.. मेरे साथ..उसने भी हंसके कहा, और कौन है...तेरे साथ !!

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है