अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

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जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

रिश्तों को वक़्त और हालात बदल देते हैं...अब तेरा ज़िक्र होने पर हम बात बदल देते हैं ..

मुझे छोड़ने की वजह तो बता देते मुझसे नाराज़ थे या मुझ जैसे हज़ार थे

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

तेरी मुस्कान, तेरा लहज़ा, और तेरे मासूम से अल्फाज़..और क्या कहूँ... बस बहुत याद आते हो तुम..

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

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जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

तेरी मुस्कान, तेरा लहज़ा, और तेरे मासूम से अल्फाज़..और क्या कहूँ... बस बहुत याद आते हो तुम..

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.