अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
साजिशों का पहरा होता है हर वक़्त रिश्ते भी बेचारे क्या करें, टूट जाते हैं बिखर कर...
काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!
किस_किस बात का गिला करें इस बेवफा जमाने मे, किसी ने दोस्ती छोडी, किसी ने दिल तोड़ा, किसी ने वादे तोड़े और, किसी ने तनहा छोड़ा !!!
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
साजिशों का पहरा होता है हर वक़्त रिश्ते भी बेचारे क्या करें, टूट जाते हैं बिखर कर...
काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!
किस_किस बात का गिला करें इस बेवफा जमाने मे, किसी ने दोस्ती छोडी, किसी ने दिल तोड़ा, किसी ने वादे तोड़े और, किसी ने तनहा छोड़ा !!!
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!