शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं
शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं