रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.