तुम बिलकुल चाँद की तरह हो नूर भी उतना गुरूर भी उतना और मुझसे दूर भी उतना ...

तुम बिलकुल चाँद की तरह हो नूर भी उतना गुरूर भी उतना और मुझसे दूर भी उतना ...

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पता नहीं क्या बात है तुज में जो हर पल तुम्हे सोच कर भी मन नहीं भरता है

ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...

सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!

जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया

मुझे समझना है तो बस अपना समझ लेना क्यूकि हम अपनों का साथ खुद से ज्यादा निभाते हैं

खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .

पता नहीं क्या बात है तुज में जो हर पल तुम्हे सोच कर भी मन नहीं भरता है

ऐसा-वैसा नहीं बेहद और बेशुमार चाहिये... मुझे तुम... तुम्हारा वक्त... और तुम्हारा प्यार चाहिये...

सुना है तुम ज़िद्दी बहुत हो, मुझे भी अपनी जिद्द बना लो !!

जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया

मुझे समझना है तो बस अपना समझ लेना क्यूकि हम अपनों का साथ खुद से ज्यादा निभाते हैं

खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .