जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…
ज़िन्दगी ने तो एक बात सीखा दी की हम किसी के लिए हमेशा खास नहीं रह सकते
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता
रिश्ते वेहम से भी ख़तम हो जाते हैं, अक्सर क़ुसूर हमेशा गलतियों का नहीं होता
जिनको मेरी फ़िक्र नहीं उनका अब से कोई ज़िक्र नहीं
आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को…
ज़िन्दगी ने तो एक बात सीखा दी की हम किसी के लिए हमेशा खास नहीं रह सकते
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता
रिश्ते वेहम से भी ख़तम हो जाते हैं, अक्सर क़ुसूर हमेशा गलतियों का नहीं होता