सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
किसी को इतना IGNORE मत करो की वह तुम्हारे बिना जीना सिख जाए
हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
बुरा लगता है हर बार किसी को अपनी याद दिलाना जिन में वफ़ा होती है खुद ही याद कर लेते हैं
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
किसी को इतना IGNORE मत करो की वह तुम्हारे बिना जीना सिख जाए
हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही