शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है.
समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर, हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा है…
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है.
समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
ये दिल भी उसी पे मरता है जो हमारी कदर नहीं करता
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....